उम्र से बड़ा कारनामा
छोटा बच्चा जान के हमको ना समझाना रे...जी हां अब बात एक ऐसे ही छोटे से बच्चे की जिसने कर दिखाया है अपनी उम्र से बड़ा कारनामा।
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता। एक पत्थर तबियत से तो उछालो यारों। जी हां सच्ची लगन और कड़ी मेहनत के बल पर 15 वर्षीय छात्र शिवेन्दु माधव ने वेबसाइट कोजली डाॅट काॅम बना कर पत्थर पर सुराख की कहावत को सच कर दिखाया है।
नन्हीं सी उम्र में वेबसाइट बनाने का हैरत अंगेज कारनामा करने के बाद यह पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। चारांे तरफ लोग माधव की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।
इस अविष्कार से माधव और उसका परिवार दोनों ही बेहद उत्साहित है। माधव ने इस अविष्कार को अपने तीन महीने के लगन और मेहनत का नतीजा बता रहे हैं। उनकी मेहनत अब रंग लाते दिख रही है। इस अविष्कार से माधव का कांफिडेंस और बढ़ गया है। वो अब आॅपरेटिंग सिस्टम विकसित करने के कार्य में लगने की तैयारी में हैं। उसने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता डाॅ वीरेन्दª मणी के मार्गदर्शन को दिया । तो दूसरी ओर अपने बच्चे की सफलता से डाॅ त्रिपाठी फूले नहीं समा रहे हैं।
कहते हैं होनहार बीरवान के होत चिकने पात। छोटी सी उम्र में वेबसाइट बनाने जैसे बड़े कारनामे कर के माधव ने ये साबित कर दिखाया है कि अगर दिल में कुछ करने की चाहत हो तो उम्र कोई मायने नहीं रखता।
Thursday, June 18, 2009
एंटी रैगिंग हेल्प लाइन
रैगिंग को रोकने के लिए सरकार ने एक नया कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देष पर सराकार ने रैगिंग हेल्पलाइन का गठन किया है। अब कोई भी छात्र रैगिंग का षिकार होने पर देष के किसी कोने मंे एंटी -रैंगिंग हेल्पलाइन नंबर डायल करके सुरक्षा की गुहार लगा सकते है। हेल्पलाइन नम्बर 18001805522 डायल करते ही प्रदंह मिनट के अंदर रैंगिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
रैगिंग को रोकने के लिए सरकार ने एक नया कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देष पर सराकार ने रैगिंग हेल्पलाइन का गठन किया है। अब कोई भी छात्र रैगिंग का षिकार होने पर देष के किसी कोने मंे एंटी -रैंगिंग हेल्पलाइन नंबर डायल करके सुरक्षा की गुहार लगा सकते है। हेल्पलाइन नम्बर 18001805522 डायल करते ही प्रदंह मिनट के अंदर रैंगिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी जाती है।
काॅर्न काब्स से बिजली उत्पादन कर दिखाया
दिल में जज्बा हो तो दुनियां का कोई भी काम आसान हो सकता है। अगर उसे वक्त पर सलीके से संवारी जाए। कुछ ऐसा ही किया बिहार के योगेन्द्र ने । काॅर्न काब्स का यूज करके बिजली उत्पादन कर दिखाया। जिसके लिए लंदन की एशडेन संस्था ने उसे सम्मानित किया।
बिहार के सारण जिला के रेपुरा गांव के योगेन्द्र। जिन्होंने दुनियां की पहली ऐसी कंपनी बनायी है, जो बिजली उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में कार्न काॅब्स का इस्तेमाल करती है। इसके अलावे इसमें लकड़ी और कृषि के अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
बिना पर्यावरण को क्षति पहुंचाए स्थायी विकास करने की चाहत रखने वाले योगेन्द्र को लंदन की एशेडन नामक एक चैरिटी संस्था ब्रिटेन और विकासशील देशों में पर्यावरण संरक्षण जीवन सुधार लाने वाले प्रोजेक्ट के लिए यह अवार्ड देती है। ग्रीन आॅस्कर की तरह इस अवार्ड के रूप में योगेन्द्र को 20 हजार पौंड दिया गया है।
बायोमास से बिजली उत्पादन के लिए नये ग्रौसिफिकेशन सिस्टम के आविष्कार ने 55 वर्षीय योगेन्द्र प्रसाद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सारण रिन्यूबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन ने 2008 से इस तकनीक से बिजली पैदा कर उसकी बिक्री लगातार जारी है।
गांव की पगडंडियों से निकलकर इंग्लैण्ड पहुंची इस प्रतिभा का लोहा पूरी दुनियां को एक बार फिर मानना पड़ा कि बिहार प्रतिभाओं का भंडार है। बस जरूरत है तो इसे सजाने संवारने की।
दिल में जज्बा हो तो दुनियां का कोई भी काम आसान हो सकता है। अगर उसे वक्त पर सलीके से संवारी जाए। कुछ ऐसा ही किया बिहार के योगेन्द्र ने । काॅर्न काब्स का यूज करके बिजली उत्पादन कर दिखाया। जिसके लिए लंदन की एशडेन संस्था ने उसे सम्मानित किया।
बिहार के सारण जिला के रेपुरा गांव के योगेन्द्र। जिन्होंने दुनियां की पहली ऐसी कंपनी बनायी है, जो बिजली उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में कार्न काॅब्स का इस्तेमाल करती है। इसके अलावे इसमें लकड़ी और कृषि के अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
बिना पर्यावरण को क्षति पहुंचाए स्थायी विकास करने की चाहत रखने वाले योगेन्द्र को लंदन की एशेडन नामक एक चैरिटी संस्था ब्रिटेन और विकासशील देशों में पर्यावरण संरक्षण जीवन सुधार लाने वाले प्रोजेक्ट के लिए यह अवार्ड देती है। ग्रीन आॅस्कर की तरह इस अवार्ड के रूप में योगेन्द्र को 20 हजार पौंड दिया गया है।
बायोमास से बिजली उत्पादन के लिए नये ग्रौसिफिकेशन सिस्टम के आविष्कार ने 55 वर्षीय योगेन्द्र प्रसाद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। सारण रिन्यूबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन ने 2008 से इस तकनीक से बिजली पैदा कर उसकी बिक्री लगातार जारी है।
गांव की पगडंडियों से निकलकर इंग्लैण्ड पहुंची इस प्रतिभा का लोहा पूरी दुनियां को एक बार फिर मानना पड़ा कि बिहार प्रतिभाओं का भंडार है। बस जरूरत है तो इसे सजाने संवारने की।
90 प्रसेंट रेल थाने नक्सल प्रभवित
झारखंड की रेल पुलिस नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए बस लाठी के सहारे है। यहां के 90 प्रसेंट रेल थाने
नक्सल प्रभवित इलाकों में आते हैं पर इन थानों में संसाधनों का धोर आभाव है।
ये डांल्टेनगंज का रेलवे थाना है। यहां यात्रियों को सुरक्षा देने के लिए तैनात है ये पुिलस वाले। पर हथिहार के नाम पर इनके पास है तो बस लाठी। ये हालत सिर्फ डाल्टेनगंज रेलवे थाने की नहीं। झारखंड के सभी रेल थानों का यही हाल है।
व्ह भी तब जबकि यहां के 90 प्रसेंट थाने नक्सल प्रभवित इलाकों में आते हैं। ऐसे में यहां यात्रियो की सुरक्षा भगवान भरोसे ही नजर आती है।
ऐसा नहीं कि पुलिस की यह हालत सरकार को नजर नहीं आती । पांच साल पहले सूबे के कई थानों को हाईटेक करने की योजना सरकार ने बनाई थी पर इसपर आज तक अमल नही हो पाया। प्रयाप्त हथिहार न होने के कारण नक्सली
आराम से इन इलाकेां में रेलवे को समय- समय पर निषाना बनाते रहते हैं।
सरकार के बेपरवाह रवैये से जहां के यात्रियों की सुरक्षा पर तो सवालिया निषान लगा है वहीं आय दिन पुलिस वाले नक्सलियों के हमले का षिकार भी हो रहे हैं।
झारखंड की रेल पुलिस नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए बस लाठी के सहारे है। यहां के 90 प्रसेंट रेल थाने
नक्सल प्रभवित इलाकों में आते हैं पर इन थानों में संसाधनों का धोर आभाव है।
ये डांल्टेनगंज का रेलवे थाना है। यहां यात्रियों को सुरक्षा देने के लिए तैनात है ये पुिलस वाले। पर हथिहार के नाम पर इनके पास है तो बस लाठी। ये हालत सिर्फ डाल्टेनगंज रेलवे थाने की नहीं। झारखंड के सभी रेल थानों का यही हाल है।
व्ह भी तब जबकि यहां के 90 प्रसेंट थाने नक्सल प्रभवित इलाकों में आते हैं। ऐसे में यहां यात्रियो की सुरक्षा भगवान भरोसे ही नजर आती है।
ऐसा नहीं कि पुलिस की यह हालत सरकार को नजर नहीं आती । पांच साल पहले सूबे के कई थानों को हाईटेक करने की योजना सरकार ने बनाई थी पर इसपर आज तक अमल नही हो पाया। प्रयाप्त हथिहार न होने के कारण नक्सली
आराम से इन इलाकेां में रेलवे को समय- समय पर निषाना बनाते रहते हैं।
सरकार के बेपरवाह रवैये से जहां के यात्रियों की सुरक्षा पर तो सवालिया निषान लगा है वहीं आय दिन पुलिस वाले नक्सलियों के हमले का षिकार भी हो रहे हैं।
लड़ाकू विमान सुखोई-30
भारतीय वायु सेना के सबसे सशक्त लड़ाकू विमान सुखोई-30 को असम के तेजपुर में तैनात किये जाने के बाद इसकी तैनाती बिहार के पूर्णिया में भी की जाएगी। चीन की लाल सेना की सुनियोजित तैयारियों को देखते हुए भारत सरकार भी सतर्क हो गयी है। पूर्णिया हवाई अड्डे पर इन दिनों काफी हलचल बड़ गई है। इस संबंध में वायु सेना के अधिकारीयों ने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की तैनाती के सिलसिले में हवाई अड्डे को विकसित किए जाने के संबंध में कोई जानकारी देने से इन्कार कर दिया। जबकि पूर्णिया के लोगों का कहनाम है कि इन दिनों वायु सेना के विमानों की आवाजाही पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
भारतीय वायु सेना के सबसे सशक्त लड़ाकू विमान सुखोई-30 को असम के तेजपुर में तैनात किये जाने के बाद इसकी तैनाती बिहार के पूर्णिया में भी की जाएगी। चीन की लाल सेना की सुनियोजित तैयारियों को देखते हुए भारत सरकार भी सतर्क हो गयी है। पूर्णिया हवाई अड्डे पर इन दिनों काफी हलचल बड़ गई है। इस संबंध में वायु सेना के अधिकारीयों ने सुखोई-30 लड़ाकू विमानों की तैनाती के सिलसिले में हवाई अड्डे को विकसित किए जाने के संबंध में कोई जानकारी देने से इन्कार कर दिया। जबकि पूर्णिया के लोगों का कहनाम है कि इन दिनों वायु सेना के विमानों की आवाजाही पहले से ज्यादा बढ़ गई है।
धन्यवाद यात्रा
लोकसभा चुनाव में मिली शानदार सफलता के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निकल पड़े हैं धन्यवाद यात्रा पर। इस यात्रा में मुख्यमंत्री बिहार की जनता को राजग को अपार समर्थन देने के लिए धन्यवाद देगें। पहले न्याय, फिर विकास और अब धन्यवाद यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एक साथ निकले हैं धन्यवाद यात्रा पर। विकसित और नया बिहार बनाने के लिए एक दिन में तीन संसदीय क्षेत्रों का दौरा कर आमजन से रु-ब-रु होगें ये नेता।
धन्यवाद यात्रा को अगले विधान सभा की तैयारी का पार्ट मानने से इंकार करते हैं मुख्यमंत्री। नीतीश कुमार इस यात्रा को एक संकल्प के रुप में लेकर लोगों जोड़ने निकले हैं न कि तोड़ने।
केन्द्र सरकार की बात हो और नीतीश कुमार का केन्द्र पर वार न हो ये कैसे हो सकता है। धन्यवाद यात्रा पर जाते समय नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात दुहराई।
लोकसभा चुनाव में मिली शानदार सफलता के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार निकल पड़े हैं धन्यवाद यात्रा पर। इस यात्रा में मुख्यमंत्री बिहार की जनता को राजग को अपार समर्थन देने के लिए धन्यवाद देगें। पहले न्याय, फिर विकास और अब धन्यवाद यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एक साथ निकले हैं धन्यवाद यात्रा पर। विकसित और नया बिहार बनाने के लिए एक दिन में तीन संसदीय क्षेत्रों का दौरा कर आमजन से रु-ब-रु होगें ये नेता।
धन्यवाद यात्रा को अगले विधान सभा की तैयारी का पार्ट मानने से इंकार करते हैं मुख्यमंत्री। नीतीश कुमार इस यात्रा को एक संकल्प के रुप में लेकर लोगों जोड़ने निकले हैं न कि तोड़ने।
केन्द्र सरकार की बात हो और नीतीश कुमार का केन्द्र पर वार न हो ये कैसे हो सकता है। धन्यवाद यात्रा पर जाते समय नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात दुहराई।
बीस सालों तक राज
अपनी बदौलत सूबे और केन्द्र की सत्ता में बीस सालों तक राज
करने वाले लालू की चमक अब फीकी पडने लगी
है। नौबत यहां तक है कि अब उनके पाॅलीटिकल
कैरियर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैंऔर इन
सवालों के बीच भी एक अहम सवाल यह है कि क्या
सचमुच लालू बिहार की राजनीति के इतिहास बन चुके हैं।
गोल मटोल मासूम चेहरा ! आंखों पे चश्मा और गम्भीर
बातों को हल्के अंदाज में पेश करने की महारथ हासिल किये ये हैं
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ,पूर्व रेल मंत्री हमारे लालू प्रसाद यादव।
अपने चम्तकारिक शैली से बीस वर्षों तक सत्ता का स्वाद चखने वाले
लालू को क्या पता था एक हार उनके और उनकी पार्टी की दशा
और दिशा दोनों बदल कर रख देगी ।नौबत यहां तक आ जाएगी
कि उनके पालीटिकल कैरियर पर ही सवाल उठने लगेंगे।
लालू प्रसाद को लेकर उठते यह सवाल लोकसभा चुनाव में
उनकीे पार्टी की करारी हार के बाद उठने लगे हैं
यहां तक की लालू ने भी जैसे तैसे अपनी सीट पक्की की।हलांकि
राज्य की सत्ता हाथ से जाने के बाद यह उम्मीद की
जा रही थी केन्द्र में उनकी मौजूदगी बरकरार रहेगी।
लेकिन ऐसा हो न सका। कभी लालू के करीबी रहे रंजन यादव
तो इसे सहज ही मानते हैं।
लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकत्र्ताओं में अब भी जोश
बरकरार है और अपने नेता में उतनी ही गहरी आस्था भी है।
पार्टी के प्रधान महासचिव की माने तो पार्टी अपने नेता
की बदौलत जल्द वापस आएगी।
ताजा बयानों पर गौर करें तो लालू और उनके कैरियर के
बीच अब मात्र 2010 नवंबर तक फासला बचा है।
अपनी बदौलत सूबे और केन्द्र की सत्ता में बीस सालों तक राज
करने वाले लालू की चमक अब फीकी पडने लगी
है। नौबत यहां तक है कि अब उनके पाॅलीटिकल
कैरियर को लेकर भी सवाल उठने लगे हैंऔर इन
सवालों के बीच भी एक अहम सवाल यह है कि क्या
सचमुच लालू बिहार की राजनीति के इतिहास बन चुके हैं।
गोल मटोल मासूम चेहरा ! आंखों पे चश्मा और गम्भीर
बातों को हल्के अंदाज में पेश करने की महारथ हासिल किये ये हैं
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ,पूर्व रेल मंत्री हमारे लालू प्रसाद यादव।
अपने चम्तकारिक शैली से बीस वर्षों तक सत्ता का स्वाद चखने वाले
लालू को क्या पता था एक हार उनके और उनकी पार्टी की दशा
और दिशा दोनों बदल कर रख देगी ।नौबत यहां तक आ जाएगी
कि उनके पालीटिकल कैरियर पर ही सवाल उठने लगेंगे।
लालू प्रसाद को लेकर उठते यह सवाल लोकसभा चुनाव में
उनकीे पार्टी की करारी हार के बाद उठने लगे हैं
यहां तक की लालू ने भी जैसे तैसे अपनी सीट पक्की की।हलांकि
राज्य की सत्ता हाथ से जाने के बाद यह उम्मीद की
जा रही थी केन्द्र में उनकी मौजूदगी बरकरार रहेगी।
लेकिन ऐसा हो न सका। कभी लालू के करीबी रहे रंजन यादव
तो इसे सहज ही मानते हैं।
लेकिन राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकत्र्ताओं में अब भी जोश
बरकरार है और अपने नेता में उतनी ही गहरी आस्था भी है।
पार्टी के प्रधान महासचिव की माने तो पार्टी अपने नेता
की बदौलत जल्द वापस आएगी।
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बीच अब मात्र 2010 नवंबर तक फासला बचा है।
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- HIMMAT SE KAM LOGE TO ZMANA V SATH DEGA...HO GAYE KAMYAB TO BCHACHA-BCHCHA V NAM LEGA.....MAI EK BAHTE HWA KA JHOKA HU JO BITE PAL YAD DILAUNGA...HMESHA SE CHAHT HAI KI KUCHH NYA KAR GUZRNE KI...MAI DUNIA KI BHID ME KHONA NHI CHAHTA....